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छात्रों के प्रदर्शन पर तमिलनाडु सरकार का ‘ब्रेक’! CJP और लेफ्ट के आंदोलन से दूरी के आदेश पर भड़के सौरव दास

तमिलनाडु सरकार ने छात्रों को CJP और लेफ्ट के राजनीतिक प्रदर्शनों से दूर रखने का निर्देश दिया। CJP प्रवक्ता सौरव दास ने इसे गैर-संवैधानिक बताते हुए विरोध किया।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Tamil Nadu Govt Ban Student’s Protest: तमिलनाडु में छात्रों की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने स्कूल और कॉलेज छात्रों को राजनीतिक प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकने के लिए शिक्षा विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन को आपसी समन्वय से कार्रवाई करने को कहा है।

छात्रों के प्रदर्शन पर रोक

सरकारी आदेश में विशेष रूप से लेफ्ट पार्टियों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से आयोजित प्रदर्शनों में छात्रों की भागीदारी रोकने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग और उच्च शिक्षा विभाग को इस संबंध में जरूरी कदम उठाने को कहा गया है, जबकि पुलिस और जिला प्रशासन को भी निगरानी और कार्रवाई में शामिल किया गया है।

14 अगस्त के आदेश पर CJP ने उठाए सवाल

यह निर्देश 14 अगस्त को राज्य की यूनिवर्सिटीज के रजिस्ट्रारों को जारी किए गए। आदेश सामने आने के बाद CJP ने सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना की और इसे “गैर-संवैधानिक” करार देते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की। CJP प्रवक्ता सौरव दास ने सरकार के कदम पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी सरकार को नागरिकों के शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने के अधिकार पर रोक नहीं लगानी चाहिए। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार महत्वपूर्ण है।

NEET विरोध के बीच आया फैसला

सरकार का यह आदेश ऐसे समय आया है, जब तमिलनाडु में NEET को लेकर छात्र संगठनों के प्रदर्शन जारी हैं। लेफ्ट से जुड़े छात्र संगठन भी इन मुद्दों पर विरोध कर रहे हैं, जबकि CJP NEET को पूरी तरह खत्म करने की मांग उठा रही है। ऐसे में छात्रों को राजनीतिक प्रदर्शनों से दूर रखने के निर्देश का असर इन आंदोलनों पर पड़ने की संभावना है। सरकार का तर्क छात्र हित और प्रशासनिक नियंत्रण से जुड़ा है, जबकि विरोध करने वाले इसे अभिव्यक्ति और लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश बता रहे हैं।

पुराने केस वापस लेने के बाद नया आदेश क्यों?

इस पूरे मामले में एक और पहलू चर्चा में है। कुछ समय पहले विजय सरकार ने एंटी-NEET प्रदर्शनों से जुड़े पुराने मामलों को वापस लेने का निर्देश दिया था। इनमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज केस भी शामिल थे। अब छात्रों को राजनीतिक आंदोलनों से दूर रखने के नए निर्देश ने सरकार की नीति को लेकर बहस छेड़ दी है। एक तरफ सरकार प्रदर्शन में छात्रों की भागीदारी रोकने पर जोर दे रही है, तो दूसरी ओर CJP इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर सवाल उठा रही है।

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